➤ जयराम ठाकुर के नेतृत्व में BJP विधायकों ने अटैची लेकर कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए
➤ ‘अटैची वाला मुख्यमंत्री किसने देखा, हमने देखा’ के नारे लगे, नीरज भारती के पुराने आरोपों को लेकर सरकार पर निशाना
➤ वंदे मातरम पर व्यवस्था की मांग पूरी नहीं होने पर विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और वॉकआउट कर दिया
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा विधायकों ने अटैची लेकर विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में विपक्ष के विधायकों ने कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और नारेबाजी की।
भाजपा विधायकों ने प्रदर्शन के दौरान ‘अटैची वाला मुख्यमंत्री किसने देखा, हमने देखा, हमने देखा’ के नारे लगाए। BJP ने यह प्रदर्शन पूर्व सीपीएस एवं कृषि मंत्री के बेटे नीरज भारती की ओर से अटैची को लेकर लगाए गए पुराने आरोपों को आधार बनाकर किया।
नीरज भारती ने किसी का नाम लिए बिना आरोप लगाया था कि दो अटैची खुद रखी जाती हैं और तीन दिल्ली भेजी जाती हैं। भाजपा ने इसी बयान को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस सरकार पर हमला तेज किया है।

जयराम ठाकुर ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप।
प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूबी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की बातें अब हर चौक-चौराहे पर सुनने को मिल रही हैं।
जयराम ठाकुर ने नीरज भारती के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के ही नेता सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं और हर काम के रेट तय हैं।
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के लिए कथित तौर पर व्यक्ति और कमीशन पहले से तय किए जाते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सप्लाई के सामान की खरीद, टेंडर और आउटसोर्स एजेंसियों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए।
हालांकि ये सभी विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

कांग्रेस ने भी विधानसभा के बाहर किया प्रदर्शन।
भाजपा के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस विधायकों ने भी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। दोनों पक्षों के बीच भ्रष्टाचार और वंदे मातरम विवाद को लेकर राजनीतिक टकराव जारी रहा।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के आमने-सामने आने से विधानसभा परिसर में माहौल काफी गरम रहा।
सदन के अंदर भी वंदे मातरम पर हंगामा।
विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष विधानसभा अध्यक्ष से वंदे मातरम के गायन को लेकर व्यवस्था देने की मांग कर रहा था।
काफी देर तक मांग पूरी नहीं होने पर विपक्षी विधायक भड़क गए और सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
इसके बाद विपक्षी विधायक सदन से वॉकआउट कर गए।
‘CM के झूठ पर पर्दा डाल रहे स्पीकर’।
जयराम ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के आरोपों को बेनकाब करने के बजाय विधानसभा अध्यक्ष उनके बयान पर पर्दा डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग विपक्ष का अधिकार है और इसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए। भाजपा नेता ने मांग की कि विधानसभा में वह वीडियो क्लिप दिखाई जाए, जिसमें भाजपा विधायकों के खिलाफ लगाए गए राष्ट्रगान के अपमान के आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
वंदे मातरम और राष्ट्रगीत से जुड़े विवाद पर जयराम ठाकुर ने कहा कि देश की संसद में राष्ट्रगीत का गायन हो चुका है और संविधान तथा संसद से ऊपर कुछ नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से कांग्रेस वर्किंग कमेटी के निर्देशों को लेकर दिए गए बयान पर भी निशाना साधा।
पहले दिन से जारी है वंदे मातरम को लेकर विवाद।
वंदे मातरम विवाद की शुरुआत मानसून सत्र के पहले दिन हुई थी। विधानसभा की कार्यवाही राष्ट्रगान के साथ शुरू हुई। इसके बाद वंदे मातरम का गायन नहीं होने पर विपक्षी भाजपा ने सवाल खड़े किए और सदन में हंगामा शुरू हो गया।
हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी थी।
स्पीकर की ओर से कहा गया कि हिमाचल विधानसभा में सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से और समापन के अवसर पर राष्ट्रगीत के गायन की परंपरा रही है। वहीं विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार की व्यवस्था के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर प्रावधान है।
इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष ने भाजपा विधायकों पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया। कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सदन के बाहर भी धरना दिया था।
विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राष्ट्रगीत के गायन की मांग पर अपना रुख कायम रखा।
शनिवार को भी नहीं चल पाया था सदन।
वंदे मातरम को लेकर गतिरोध शनिवार को भी जारी रहा। विधानसभा अध्यक्ष ने पहले सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित की। इसके बाद दोपहर बाद कार्यवाही को सोमवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
सोमवार को तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही विवाद फिर सामने आ गया। विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से व्यवस्था देने की मांग की और इसके बाद नारेबाजी शुरू हो गई।
इस तरह मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में वंदे मातरम विवाद लगातार सदन की कार्यवाही पर भारी पड़ रहा है। अब विपक्ष के वॉकआउट के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध आगे किस तरह बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें हैं।



